रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखार प्यार गंगा की धार भूख सह कर भी मां दर्द से जार-जार तृप्त कर दे शिशु को कैसी खुश हो अपार भर के … more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →
Ajad Panchhi wrote 5 months ago: चौबीस साल तक अपनी बेटी को तहखाने में बंद रख उसके साथ दुराचार कर उसे आठ बच्चों की मां बनाने के आरोपी … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →
योगेन्द्र wrote 6 months ago: मेरे शहर वाराणसी से दस-बारह किलोमीटर दूर एक गैरसरकारी संगठन द्वारा संचालित संस्था है, जिसमें उन बच् … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: This is a poem I wrote for my Ma on her Birthday. She cried reading it just the way I had cried whil … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: बहुत समय पहले बचकानी सी यह कविता लिखी थी, पर मां पर कविता बच्चे ही तो लिखेंगे। और जब बच्चे लिखेंगे त … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →