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Blogs about: माखनलाल चतुर्वेदी

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यौवन का पागलपन - माखनलाल चतुर्वेदी

Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: हम कहते हैं बुरा न मानो, यौवन मधुर सुनहली छाया। सपना है, जादू है, छल है ऐसा पानी पर बनती-मिटती रेखा- … more →

यह अमर निशानी किसकी है? - माखनलाल चतुर्वेदी

Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: यह अमर निशानी किसकी है? बाहर से जी, जी से बाहर- तक, आनी-जानी किसकी है? दिल से, आँखों से गालों तक- यह … more →

पुष्प की अभिलाषा - माखनलाल चतुर्वेदी

Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नह … more →

निःशस्त्र सेनानी

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: माखनलाल चतुर्वेदी     ‘सुजन, ये कौन खड़े है ?’ बन्धु ! नाम ही है इनका बेनाम । ‘कौन … more →

Tags: आधुनिक काल-कविताएं, निःशस्त्र सेनानी

कैदी और कोकिला

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: कवि: माखनलाल चतुर्वेदी —————-   क्या गाती हो? क्यों रह-रह जाती हो? कोक … more →

Tags: आधुनिक काल-कविताएं, कैदी और कोकिला, mp psc mppsc hindi sahitya

लड्डू ले लो3 comments

Rewa Smriti wrote 1 year ago: ले लो दो आने के चार लड्डू राज गिरे के यार यह हैं धरती जैसे गोल ढुलक पड़ेंगे गोल मटोल इनके मीठे स्वाद … more →

वरदान या अभिशाप?

Rewa Smriti wrote 1 year ago: कौन पथ भूले, कि आये ! स्नेह मुझसे दूर रहकर कौनसे वरदान पाये? यह किरन-वेला मिलन-वेला बनी अभिशाप होकर, … more →

पुष्प की अभिलाषा

Rewa Smriti wrote 1 year ago: चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नह … more →

घर मेरा है?

Rewa Smriti wrote 1 year ago: क्या कहा कि यह घर मेरा है? जिसके रवि उगें जेलों में, संध्या होवे वीरानों मे, उसके कानों में क्यों कह … more →

पुष्प की अभिलाषा

kuldeepsingh wrote 1 year ago:   चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ, … more →

Tags: पुष्प, अभिलाषा


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