Blogs about: मातृभाषा

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बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep

मनुस्मृति-अपशब्द का उत्तर अपशब्द से न दें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म वि … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, धर्म, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Culture, Dashboard

हिंदी भाषा में लेखक का आचरण भी देखा जाता है-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी और उर्दू दो अलग भाषायें हैं पर बोली होने की वजह से एक जैसी लगती हैं। यह भाषायें इस तरह आपस मे … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

बहस करने का फैशन-हास्य व्यंग्य कविताएँ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: नारी की आज़ादी विषय पर उन्होने महफ़िल सजाई दर्शक दीर्घा में पुरुषों के लिए भी कुर्सी सजाई पूछने प … more →

Tags: कविता, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, online jurnalism, Family, Blogging, bharat

जज्बात की पतली धारा-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पड़ौसन ने कहा उस औरत से ‘तुम्हारा आदमी रात को रोज शराब पीकर आता है पर तुम कुछ नहीं कहती वह आराम से … more →

Tags: अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep

पाठ नंबर 3013-विशेष संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अगर चिट्ठाजगत पर दर्ज आंकड़ों को सही मान लिया जाये तो इस लेखक का अंतर्जाल पर यह 3013वां पाठ होना चा … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, media, Internet, Bloging, Education, Blogging, bharat, web duniya

प्रतियोगिता से कहीं अधिक वजन जंग में आता है-लघु व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →

Tags: vews, inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Life, media, Internet, Bloging

‘इंग्लिश वर्ड्‌ज’ की भरमार हिन्दी में 4 comments

योगेन्द्र wrote 7 months ago: मैं दैनिक समाचारपत्र ‘हिन्दुस्तान’ (लखनऊ संस्करण) का नियमित पाठक हूं । इस समाचारपत्र के साथ सप्ताह म … more →

Tags: अंग्रेजी, राजभाषा, हिन्दी, पत्रकारिता, हिंग्लिश, देवनागरी, साहित्यिक रचना, आम आदमी, टीवी चैनल

क्या आतंकी हिंसा अपराध शास्त्र से बाहर का विषय है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →

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अंतर्जाल पर चालाकियों का मुकाबला तो करना ही होगा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही अंतर्जाल लेखक ब्लागरों की शोषण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस काम में जुट … more →

Tags: inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, Internet, Bloging, Urdu, Education, Blogging, Friends

इस तरह लगने लगा वहां भी मेला-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उदास बैठा था चेला तो गुरू ने उसका कारण पूछा तो वह बोला ‘गुरूजी सभी आश्रम पर भक्तों का लगता है मेला … more →

Tags: Blogroll, hindi, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य कविता, media, Internet

निकल पड़ें अनजाने सफर पर-कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब भी हम ढूढ़ते हैं अपने लिए प्यार पर मिलती है सब जगह से दुत्कार खुद करो चाहे किसी से भी तुम मांगो … more →

Tags: अभिव्यक्ति, व्यंग्य कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, कला, मस्तराम

शब्द हमेशा हवाओं में लहराते हैं-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता है जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, media, Internet

हास्य कविताएं और गंभीर चिंतन है पाठकों की पसंद-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कविता लिखना बहुत सहज है और कोई भी लिख सकता है पर वह पाठक के हृदय में उतर जाये वही कविता उसकी भाषा … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, संपादकीय, समाज

अपनी मूल भाषा में लिखने से पाठ में आती है स्वाभाविक मौलिकता-आलेख(2)

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: किसी भी राष्ट्र, भाषा, जाति, धर्म और और समाज की बौद्धिक शक्ति का केंद्र बिंदू सदैव ही मध्यम वर्ग रहा … more →

Tags: Blogroll, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, सूचना, media, Internet, Bloging, Urdu

अपनी मूल भाषा में लिखने से पाठ में आती है स्वाभाविक मौलिकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे विचार से अब हमें यह तय करना चाहिए कि हम अपनी भाषा के साथ अपना मौलिक जीवन जीना चाहते है या अंग्र … more →

Tags: vews, हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, सूचना, व्यंग्य, media, Education, Blogging

अंतर्जाल पर पाठ के शीर्षक की अधिक महत्वपर्ण भूमिका है-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने एक बार एक ब्लाग देखा था जिसके लेखक ंने चार ब्लाग लेखकों के नाम शीर्षक में लिखकर अपना पाठ पूर … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, Internet, arebic, Education, Family

साहित्य कुंजःअंतर्जाल पर हिंदी की श्रेष्ठ साहित्यक पत्रिका-समीक्षा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इस समय अंतर्जाल पर जो हिंदी भाषा की पत्रिकाएं निकल रहीं है उसमें मुझे साहित्य कुंज बहुत प्रभावित करत … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, सूचना, Internet, Urdu, Education

यह तो है हिंदी का अंतर्जाल युग -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी की विकास यात्रा का चार खंडों में बांटा जाता है और इसमें हमारे यहां सबसे अधिक भक्ति काल महत्वपू … more →

Tags: vews, inglish, vishwas, संपादकीय, अभिव्यक्ति, नज़रिया, सूचना, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य


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