सपने जैसे शहर में ख्वाब लगती उस इमारत की छत के नीचे रौशनी की चमक से आंखें चुंधिया गयी हैं फिर याद आती है पीछे छोड़ आये उस शहर और घर की जहां अंधेरे भी अक्सर आ जाते हैं। राहें ऊबड़ खाबड़ है गिरने का डर साथ… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सपने जैसे शहर में ख्वाब लगती उस इमारत की छत के नीचे रौशनी की चमक से आंखें चुंधिया गयी हैं फिर याद आत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हमने छोड़ दिया यकीन करना धोखे की बचने को यही रास्ता मिला उधार तो अब भी देते हैं वापसी पर नहीं होता कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कौटिल्य महाराज के अनुसार —————————- उच्चेरुच्च … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: लो आ गया हिन्दी दिवस नारे लगाने वाले जुट गये हैं। हिंदी गरीबों की भाषा है यह सच लगता है क्योंकि वह भ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: एक पुराने कवि ने अपनी पहली कविता लिखने के दिवस को साहित्यक पदार्पण दिवस के रूप में मनाया। ढेर सारे ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वासनओं पर जितना नियंत्रण करोगे वह बढ़ती जायेंगी। तुम उन्हें भगाने की कोशिश मत करो वह तुम्हें दौड़ायेंग … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उस दिन अखबार में पढ़ा कि चीन में इंटरनेट के हेकर्स को प्रशिक्षण देने वाले बकायदा संस्थान खुल गये हैं। … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: उसने पूछा ‘क्या तुम बुरे आदमी हो‘ जवाब मिला ‘कभी अपने काम से कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला इसलिये क … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म विष … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हिंदी और उर्दू दो अलग भाषायें हैं पर बोली होने की वजह से एक जैसी लगती हैं। यह भाषायें इस तरह आपस में … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: नारी की आज़ादी विषय पर उन्होने महफ़िल सजाई दर्शक दीर्घा में पुरुषों के लिए भी कुर्सी सजाई पूछने पर ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: पड़ौसन ने कहा उस औरत से ‘तुम्हारा आदमी रात को रोज शराब पीकर आता है पर तुम कुछ नहीं कहती वह आराम से स … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अगर चिट्ठाजगत पर दर्ज आंकड़ों को सही मान लिया जाये तो इस लेखक का अंतर्जाल पर यह 3013वां पाठ होना चाह … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मैं दैनिक समाचारपत्र ‘हिन्दुस्तान’ (लखनऊ संस्करण) का नियमित पाठक हूं । इस समाचारपत्र के साथ सप्ताह म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही अंतर्जाल लेखक ब्लागरों की शोषण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस काम में जुट र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उदास बैठा था चेला तो गुरू ने उसका कारण पूछा तो वह बोला ‘गुरूजी सभी आश्रम पर भक्तों का लगता है मेला ख … more →