Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: सोंचा था ईश्वर ने दुनियां हो रंगीन ना रहे कोई एकाकी जानवर तो जानवर फिर नर क्यों अकेला? जैसे हाथी और … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: हाय री मानवता ! तू कहां खो गयी ? कितना ढ़ूंढ़ा तुझे ? पर तू तो गुम हो गयी। तुझे ढ़ूंढ़ते ढ़ूंढते तुझ विही … more →