मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम्हलाकर सब व्यर्थ हो जायगा दिखा दिखा कर अकड़ रहा हूं क्षण गया यह तो अनर्थ हो जायगा बिना तृप्त किये अहं … more →
हरिहर झाNidhi KM wrote 3 months ago: मैने कयी बार, कभी अपनों के, कभी तुम्हारे कहने पर, नयी सुबह का इंतज़ार किया, नयी माला मे फूल गुथे, नय … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम् … more →