Blogs about: माह

महफ़िले-उश्शाक़ में आशिक़ हम-सा न पाओगे

विनय wrote 1 year ago: महफ़िले-उश्शाक़ में आशिक़ हम-सा न पाओगे बेकार की बातें हैं सभी दिल को कब तक जलाओगे सहर में शुआ शाम को म … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Heart, दिल, शाम, आशिक़, महफ़िल, Hurt, Beloved, जफ़ा