विनय wrote 7 months ago: कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है … more →
विनय wrote 9 months ago: तो अब दोस्त रह गये बस नाम के हम अज़ीज़ है … more →
विनय wrote 9 months ago: न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी तुमको पाने की … more →
विनय wrote 1 year ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतल … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने मे … more →