हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है? तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू क्या है? रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है? चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन हमा… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 3 years ago: हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है? तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू क्या है? रगों में दौड़ते … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है? हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद जो नहीं जानते … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक। आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बे … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता। तेरे वादे पर जिए हम तो … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है। देखिए पाते हैं उशशाक़ … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे। होता है निहाँ गर्द में सहरा … more →