“सखी मोरि नींद नसानी हो पिय को पंथ निहारत सगरी रैना बिहानी हो। सखियन मिलकर सीख दई मन, एक न मानी हो। बिन देख्यां कल नाहिं पड़त जिय, ऐसी ठानी हो। अंग-अंग ब्याकुल भई मुख, पिय पिय बानी हो।” कर… more →
वर्ड प्रेस पर आलसीwrote 6 days ago: नए साल में… निराशाओं के अंधेरे में आशाओं के लट्टू लेकर चलना और भिड़ जाना चुनौतियों की भींत से. … more →