कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया मसला दिल का ऐसा उलझा कश्मीर हो गया वो आये मेरे करीब तो यारों यूँ लगा मेरे ख्वाबों का ताजमहल तामीर हो गया अश्क़ थे या शबनम के क़तरे आँखों में वो जो भी थे बस देख उन्हे दि… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया मसला दिल का ऐसा उलझा कश्मीर हो गया वो आये मेरे करीब तो यारों यूँ ल … more →
विनय wrote 2 years ago: एक गिरह ज़ुबाँ में, सब के होती है वक़्त लगते ही लफ़्ज़ अटका देती है लोग क्या समझते हैं मैं ना-पाक हूँ या … more →