ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सबको तो नहीं कह सकता पर कुछ लोग को ये जरुर पसंद आएगी देर से उठते हम यारों कभी जाते नहीं नहा के ज्यादा … more →
ApurnMaheep Saraf wrote 1 hour ago: तेरे चेहरे पर ये गुस्सा ग़ज़ब हे, बहुत सताता हे याद तो इसकी भी आती हे, तेरे जाने के बाद — … more →
Maheep Saraf wrote 1 month ago: चाँद को देखता था हर रोज़ आसमान में, कभी ये मेरे भी करीब होगा आज मुट्ठी में हे चांदनी मगर, हथेली की त … more →
Maheep Saraf wrote 1 month ago: लोग मिलतें हैं महफिलों में, हज़ार चेहरों को बदल कर काम के वक़्त किसी भी अपने का चेहरा नहीं मिलता … more →
kalapiketan wrote 5 months ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 5 months ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
ramadwivedi wrote 6 months ago: १- तेरे प्यार का यह कैसा भरम है? नहीं पास तुम हो,नहीं दूर हम हैं। नहीं देते हँसने,नहीं देते रोने, ते … more →
ramadwivedi wrote 7 months ago: आह किसी की भावनाओं से,कभी खिलवाड़ मत करना, अगर न कर सको तुम प्यार का इकरार मत करना, भस्म हो जाता लोहा … more →
ramadwivedi wrote 8 months ago: रंगीन पर्व पर मुक्तक प्रस्तुत हैं….. 1- इठलाती-इतराती सी होली है आई यारो, रूठों को मनाने को हो … more →
Shubhashish Pandey wrote 10 months ago: ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सब … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: कमबख्त! अजीब खेल है ये इश्क और दीवानगी का, चैन उम्मीद करते हैं खुद को कांटे चुभोने के बाद, क्या चला … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: १- हवाएं तन को सहलाती भी हैं, हवाएं तन को तपाती भी हैं। हवा जीवन क … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: शिक्षक दिवस के अवसर पर ये चार पंक्तियाँ गुरुजनों को समर्पित … ज्ञान से ज्यादा मूल्यवान क्या है … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: 1) अक्सर कुछ उदास हो एक मोड़ पे आ ठहरता है, जाने कौन सा रिश्ता है ये .. ना बनता है ना बिखरता है ! 2) … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: दर्द कितना हो पर आंखे आसूवों को रोने नहीं देतीं मेरी बेखुदी मेरे इश्क की खबर तेरी यादों को भी नहीं ह … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: चाह के भी जिससे कोई राज छुपाया नहीं जाता है कभी हँसाता कभी रुलाता पर हर पल साथ निभाता है खून का तो न … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: दिल में दर्द दबाने की आँखों में नमी छुपाने की हर कोशिश कर के हार गए हम तेरी याद भूलाने की तेरी चाहत … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया दिल को तन्हाई तो आँखों को समंदर दिया इबादत-ए-इश्क में जिस … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: ऐसा नहीं की अब सब कुछ बदल गया पर हाँ हमने खुद को जरुर बदल डाला है कुछ हासिल नहीं होता छटपटाने से सो … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: “अरे इतनी सी बात पे परेशान होने की क्या जरुरत ये लो तुम मेरी फाइल दिखा देना,हाँ मेरी राइटिंग थ … more →