ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सबको तो नहीं कह सकता पर कुछ लोग को ये जरुर पसंद आएगी देर से उठते हम यारों कभी जाते नहीं नहा के ज्या… more →
Apurnkalapiketan wrote 3 weeks ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 3 weeks ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
ramadwivedi wrote 1 month ago: १- तेरे प्यार का यह कैसा भरम है? नहीं पास तुम हो,नहीं दूर हम हैं। … more →
ramadwivedi wrote 2 months ago: आह किसी की भावनाओं से,कभी खिलवाड़ मत करना, अगर न कर सको तुम प्यार का इ … more →
दरभंगिया wrote 3 months ago: अवकाश से लौटते हुए एक हमसफ़र बच्चे से पूछा मुझे भी अपने साथ ले चलोगे मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे कमरे म … more →
ramadwivedi wrote 3 months ago: रंगीन पर्व पर मुक्तक प्रस्तुत हैं….. 1- इठलाती-इतराती सी होली है आई यारो, रूठों … more →
Shubhashish Pandey wrote 6 months ago: ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सब … more →
Shubhashish Pandey wrote 8 months ago: कमबख्त! अजीब खेल है ये इश्क और दीवानगी का, चैन उम्मीद करते हैं खुद को कांटे चुभोने के बाद, क्या चला … more →
ramadwivedi wrote 8 months ago: १- हवाएं तन को सहलाती भी हैं, हवाएं तन को तपाती भी हैं। हवा जीवन क … more →
Shubhashish Pandey wrote 10 months ago: शिक्षक दिवस के अवसर पर ये चार पंक्तियाँ गुरुजनों को समर्पित … ज्ञान से ज्यादा मूल्यवान क्या है … more →
Shubhashish Pandey wrote 10 months ago: 1) अक्सर कुछ उदास हो एक मोड़ पे आ ठहरता है, जाने कौन सा रिश्ता है ये .. ना बनता है ना बिखरता है ! 2) … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: दर्द कितना हो पर आंखे आसूवों को रोने नहीं देतीं मेरी बेखुदी मेरे इश्क की खबर तेरी यादों को भी नहीं ह … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: चाह के भी जिससे कोई राज छुपाया नहीं जाता है कभी हँसाता कभी रुलाता पर हर पल साथ निभाता है खून का तो न … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: दिल में दर्द दबाने की आँखों में नमी छुपाने की हर कोशिश कर के हार गए हम तेरी याद भूलाने की तेरी चाहत … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया दिल को तन्हाई तो आँखों को समंदर दिया इबादत-ए-इश्क में जिस … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: ऐसा नहीं की अब सब कुछ बदल गया पर हाँ हमने खुद को जरुर बदल डाला है कुछ हासिल नहीं होता छटपटाने से सो … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: “अरे इतनी सी बात पे परेशान होने की क्या जरुरत ये लो तुम मेरी फाइल दिखा देना,हाँ मेरी राइटिंग थ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: दर्द सीने में सिसकता रहा है रात भर, यादों का सिलसिला चलता रहा है रात भर, एक बार फिर से माफ़ कर दूं उ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: समझ नहीं आता की क्या कर डालूँ मैं तुम्हें बदलने की कोशिश करूं या खुद को बदल डालूँ मैं अब और यही दर्द … more →