विनय wrote 1 year ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने मेरे दिल स … more →
विनय wrote 1 year ago: बहारों का मौसम शाख़ों पर खिलने लगा है मज़िलों की बेताबी का चाँद अब दिखने लगा है सफ़र बहुत तवील है और ल … more →