रचना: क़मर जलालवी स्वर: मुन्नी बेग़म यहाँ तंगी-ए-क़फ़स है वहाँ फ़िक्र-ए-आशियाना न यहाँ मेरा ठिकाना न वहाँ मेरा ठिकाना न फूल हैं चमन में न शाख़-ए-आशियाना फ़क़त एक बर्क़ चमके के बदल गया ज़माना मेरे सामने चमन का न… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: नासिर काज़मी स्वर: मुन्नी बेग़म / ग़ुलाम अली नीयत-ए-शौक़ भर न जाय कहीं तू भी दिल से उतर न जाय कहीं … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: क़मर जलालवी स्वर: मुन्नी बेग़म / अज़ीज़ मियाँ मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फ़साना सुनाता रहा दम निकलते … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: राज़ इलाहाबादी स्वर: मुन्नी बेग़म / अनूप जलोटा लज़्ज़त-ए-ग़म बढ़ा दीजिये, आप यूँ मुस्कुरा दीजिये कीम … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: क़तील शिफ़ाई स्वर: मुन्नी बेग़म तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है औ … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: शायर: _______ (यदि ज्ञात हो तो कृपया अवगत करायें) स्वर: मुन्नी बेग़म फ़िरदौस झूम उठे फ़ज़ा मुस्कुरा उठे … more →