एक मुलाक़ात की इल्तजा है उससे दुआ है वह क्यों नहीं मिलता मुझसे उसे क्या शुबा है मुझ मुरीद को न क़रार है यह क्या धुँआ है साँस बदन से जुदा-जुदा है मुझे क्या हुआ है मैं जिसके लिए मरना चाहता हूँ वो मेरा खु़… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: एक मुलाक़ात की इल्तजा है उससे दुआ है वह क्यों नहीं मिलता मुझसे उसे क्या शुबा है मुझ मुरीद को न क़रार ह … more →