अहम नाक़ाबिलियतों के बाबजू्द (a poem by ravi kumar, rawatbhata) जो अपना ज़मीर नहीं मार सकते वे इस मौजूदा दौर में ज़िन्दा रहने के काबिल नहीं मैं उन्हीं में से एक हूं मेरा वज़ूद मुझसे ख़फ़ा है क्योंकि मैंने … more →
सृजन और सरोकाररवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: अहम नाक़ाबिलियतों के बाबजू्द (a poem by ravi kumar, rawatbhata) जो अपना ज़मीर नहीं मार सकते वे इस मौजू … more →