भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है रूठी हुई हमसे तक़दीर हमारी है मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर हूँ मेरे पाँव में पड़ी ज़ंजीर तुम्हारी है मैं तेरे लिए अपनी जान तलक दे दूँगा मैं तेरा राँझणा और तू हीर… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 9 months ago: भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है रूठी हुई हमसे तक़दीर हमारी है मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर ह … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा वो इस ज़बाँ से उस ज़बाँ ये किस्सा ले जायेगा दुआ माँगी तो थी … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहा … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: माना ये जग है सफर चार दिन का हम हैं मुसाफिर ये मेला छूटेगा जब होगा धमाका मौत छीन लेगी खाली हाथ जाते … more →
विनय wrote 2 years ago: सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर सो गयी है कभी भर जो आती है आँख सारा मंज़र महका देती है… … more →