दिल की ज़मीं पर जज़्बातों को दिल के मैंने, तुमसे अभी कहा नहीं है ! नाम तेरा दिल की ज़मीं , पर मैंने अभी लिखा नहीं है !! जज़्ब करे क्यूं रेत मेरे आंसुओं को , जख़्म दिल का मेरे अभी भरा नहीं है ! ख़्याल-ए-दीद… more →
दिल की ज़मीं पररविकुल wrote 1 month ago: दिल की ज़मीं पर जज़्बातों को दिल के मैंने, तुमसे अभी कहा नहीं है ! नाम तेरा दिल की ज़मीं , पर मैंने अभ … more →
विनय wrote 1 year ago: जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो दिल में आकर बसा था तू वह मीत है साँसों की सरगम बस तुम ही तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो जैस … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहा … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की लगी दिल को दिल से लगी जब लगी यह आग फिर न बुझी यह दिल की लगी है दिल से लगी है जब यह लगी है फिर … more →
विनय wrote 1 year ago: अम्बर में जब चाँद खिला उस पल से चला जानाँ एक नया सिलसिला मुहब्बत भरी वादियों में इक नया गुल खिला तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से दिल मिले दिल से दिल ख़ाबों के गुल खिले ख़ाबों के गुल क़दमों के नीचे से सरकी ज़मीं मुहब्बत की ज़म … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कारवाँ किस जगह आ रुका है ज़िन्दगी को हासिल नहीं मिल रहा है हमने अब तक ऐसी मुहब्बत की है शायद जिसमे … more →
विनय wrote 1 year ago: ग़म देना उनकी फ़ितरत में शामिल होगा मेरी फ़ितरत तो मुहब्बत देने की रही है दूर रहना उनकी आदत में शामिल ह … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं मंज़िल से दूर सही ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ बेवजह ही सही लेकिन किसी से मुहब्बत करता हूँ शायिर: … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं अगर मैं झूठा हूँ तुम जो गये हो यहाँ से पल-पल मैं टूटा हूँ किसी का एतबार नह … more →
विनय wrote 1 year ago: किसी आस्माँ के परे तो तेरी मुहब्बत का हासिल मिलेगा कितनी तन्हाइयाँ तय करें कब हमें इनका हासिल मिलेगा … more →