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Blogs about: मुक़ाम

फिर वही दर्द, वही शाम है14 comments

विनय wrote 1 year ago: फिर वही दर्द, वही शाम है लबों पर फिर तेरा नाम है ज़िन्दा हूँ पर ज़िन्दगी नहीं सीने में साँसों का ताम-झ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, इश्क़, दर्द, Heart, Love, दिल, प्यार, नाम

जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ सुबह-शाम

विनय wrote 1 year ago: जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-शाम मंज़िल वह मेरी वह मेरा आख़िरी मुक़ाम वह रंगीन शाम थी शाम वह ग … more →

Tags: मेरा गीत, नूर, Love, Reminisce, दिल, चेहरा, मंज़िल, वफ़ा, शाम

दिल में दुआ दिल में पिया

विनय wrote 1 year ago: दिल में दुआ दिल में पिया दिल ने चाहा दिल ने किया इश्क़ पर किसका ज़ोर है बहती हवाओं में शोर है दिल में … more →

Tags: मेरा गीत, चाँद, इश्क़, दर्द, दिल, दुनिया, पिया, चाहा, बाँहें

रोशनी से दीवारों के साये1 comment

विनय wrote 1 year ago: रोशनी से दीवारों के साये मिटायेंगे ढूँढ़कर वह सब लायेंगे, ढूँढ़ लेंगे जो क़िस्मत की लकीरों में बँधा ह … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, light, प्यार, क़िस्मत, रोशनी, साये, मोहब्बत

तू संग न होगा

विनय wrote 1 year ago: तू कर यह वादा भी मेरे अल्लाह तू संग न होगा तू है भी अगर किसी बुते-संग में तू संग न होगा तेरी मर्ज़ी स … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, प्यार, क़िस्मत, मोहब्बत, वफ़ा, तन्हा, मर्ज़ी

तख़लीक़ हुआ है यह विनय

विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →

Tags: मेरी नज़्म, हासिल, इश्क़, तख़लीक़, Love, प्यार, क़िस्मत, मोहब्बत, सोच

सब चेहरे एक-से हो जाते हैं...

विनय wrote 2 years ago: यह कौन-सा मुक़ाम है? जहाँ आकर सब चेहरे एक-से हो जाते हैं दिल रेत बनकर सीने में गहरा और गहरा धँसने लगत … more →

Tags: मेरी नज़्म, Heart, दिल, धड़कन, साँस, रेत, पत्थर, चेहरे, राह


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