देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँस और उम्मीदें सोचता हूं मुझे भी इनपे भरोसा तो नहीं तबस्सुम सोचती रहती है हमेशा वो रहे कहीं आपको भी ऐ… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँ … more →