ढूंढता हूँ खुशियाँ जमाने भर के लिये ! कुछ तो समाँ कर लूं अपने घर के लिये !! मुफ़लिसी से भी मै आराम पा जाता, पास जो दाम होते ज़हर के लिये ! मर्तब उसके जमाने से जुदा हैं, कुछ तो पास हो उसकी नज़र के लिये ! … more →
दिल की ज़मीं परwrote 6 months ago: ढूंढता हूँ खुशियाँ जमाने भर के लिये ! कुछ तो समाँ कर लूं अपने घर के लिये !! मुफ़लिसी से भी मै आराम पा … more →