तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम्र ही ऐसी होती है लोग कुछ बहक जाते हैं मिलते हैं जब दो दिल तन्हा जिस्म महक जाते हैं महके-महके-से जिस्… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम् … more →