मंदिर के सामने उनका दफ्तर रस्ते के इस पार मंदिर और उस पार उनका दफ्तर वे जो बन बैठे है हमारे धर्म के प्रतिनिधि माहोल बना बैठे है, शोर असीमित. शाम की आरती सुनाई नहीं देती, इन धर्मादिकारियों के शराबी शोर… more →
ठेले पे हिमालयGaizabonts wrote 1 month ago: मंदिर के सामने उनका दफ्तर रस्ते के इस पार मंदिर और उस पार उनका दफ्तर वे जो बन बैठे है हमारे धर्म के … more →
prithvi wrote 6 months ago: इतिहास के अनुभवों से हम सबक नहीं लेते, इसी से इतिहास की पुनरावृत्ति होती है. – विनोबा भावे सूरतगढ़ स … more →
Gaizabonts wrote 1 year ago: भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई? काहे को भगवान बनाया? अगर मैं आज यहाँ नही होता, तो मेरी जगह … more →