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कोई सूरज हमारी ताक में है5 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, रोहित, जैन, Rohit, jain, 2008, है

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल7 comments

Rohit Jain wrote 10 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही श … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, DEC 2008, 2008, , कविता, गज़ल, जैन, ताजमहल

मोहब्बत में1 comment

Rohit Jain wrote 12 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

और भी काम हैं ज़माने में3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में पायेगा जब उस ख़ुदा ने अर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

उस इम्तिहान के पल में हम क्या कहें के झिझक गए4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरे अश्क़ेनामुराद यूं, निगाह से थे छलक गए चरागेदिल को बुझा गए, ये आज ऐसे चमक गए हमें प्यास थी दीदार … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Mar 2008, पल, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

खतरे में है3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई नहीं ये जानता के वो कब खतरे में है ज़िंदगी जीने का देखो हर सबब खतरे में है कोई यहां मंदिर को तोड़े … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Mar 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

छोटी बहर में एक प्रयोग3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: छोटी बहर में एक प्रयोग करने की गुस्ताख़ी की है आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ…. =========== … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Jul 2007, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

How to send email in Hindi to Shri Lalu Prasad Yadav ?

oskanpur wrote 1 year ago: श्री लालू प्रसाद यादव भारतीय रेल मंत्री को हिन्दी में ईमेल कैसे करें - LokVidya IT KaryaShala Evam M … more →

Tags: eMail, minister, Indian, हिन्दी, Railway, ईमेल, करें, कैसे, को

Rajasthan BJP Government introduces Small Trader Friendly Proposals

khudra wrote 1 year ago: राजस्थान की भाजपा सरकार नें किराना व लघु व्यापारी समर्थन में कानूनी कदम उठाए Small traders and hawke … more →

Tags: उठाए, कदम, कानूनी, किराना, की, नें, भाजपा, राजस्थान, लघु

एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, पल, ही, हज़ारों, मुद्दतों, की

वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है बन के लकीर हर इक, हाथों में आ बसा है वो मिले थे इत्तेफ़ाक़न हम ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है कोई साज़ नहीं है कानों में शहनाई सी है हाय तमाशा क्या लगा है … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है किस किस को मैने पुकारा नहीं है निकलता हूँ घर से तो ये सोचता हूँ वो क्य … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

आँखों में

Rohit Jain wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है आँखों में दिल में लगता है ख़वाब है इक ताबीर है आँखों में जिस स … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Dec 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

घर हवाओं में बना टिकता है क्या

Rohit Jain wrote 1 year ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या हमने तुमको साँस में शामिल किया साँस … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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