पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का हमें यारों आओ देखें के जिगर कितना उस सफ़्फ़ाक में है जो बदलती है रवानी तो बदल ले कौसर रुख़ बदलने का हुनर… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 4 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में पायेगा जब उस ख़ुदा ने अर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरे अश्क़ेनामुराद यूं, निगाह से थे छलक गए चरागेदिल को बुझा गए, ये आज ऐसे चमक गए हमें प्यास थी दीदार … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई नहीं ये जानता के वो कब खतरे में है ज़िंदगी जीने का देखो हर सबब खतरे में है कोई यहां मंदिर को तोड़े … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: छोटी बहर में एक प्रयोग करने की गुस्ताख़ी की है आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ…. =========== … more →
oskanpur wrote 1 year ago: श्री लालू प्रसाद यादव भारतीय रेल मंत्री को हिन्दी में ईमेल कैसे करें - LokVidya IT KaryaShala Evam M … more →
khudra wrote 1 year ago: राजस्थान की भाजपा सरकार नें किराना व लघु व्यापारी समर्थन में कानूनी कदम उठाए Small traders and hawke … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है बन के लकीर हर इक, हाथों में आ बसा है वो मिले थे इत्तेफ़ाक़न हम ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है कोई साज़ नहीं है कानों में शहनाई सी है हाय तमाशा क्या लगा है … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है किस किस को मैने पुकारा नहीं है निकलता हूँ घर से तो ये सोचता हूँ वो क्य … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है आँखों में दिल में लगता है ख़वाब है इक ताबीर है आँखों में जिस स … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या हमने तुमको साँस में शामिल किया साँस … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →