फुसॆत कभी मिली नहीं। जब बच्चे थे तब भी नहीं। यूं कि खेलकूद में सारा दिन बीत जाता। थोड़े बडे हुए तो किताबों ने खाली लम्हों को छीन लिया। जब दुनिया समझने लगे तो और थोडा और समझने के फेर में वक्त बीत गया।… more →
मुसाफिरdipankargiri wrote 2 years ago: फुसॆत कभी मिली नहीं। जब बच्चे थे तब भी नहीं। यूं कि खेलकूद में सारा दिन बीत जाता। थोड़े बडे हुए तो … more →