फैसलों के दरमियाँ राह के फासले गुम होते चले गए वक़्त के मरहमो ने दवा की तरह ज़ख्मो को भर तो दिया पर वक़्त के थपेड़ो ने उन्हें फिर से हरा कर दिया घाव अभी भर भी न पाए थे , कि आपने ज़ख्मो पर नमक लगा दिया… more →
शब्दों की व्यथाwrote 1 month ago: फैसलों के दरमियाँ राह के फासले गुम होते चले गए वक़्त के मरहमो ने दवा की तरह ज़ख्मो को भर तो दिया पर … more →
wrote 2 months ago: जाने किन किन राहो में भटकते रहे है हम कुछ पाने की ख्वाहिश में खुद से लड़ते रहे है हम जीवन की झूठी खु … more →
wrote 2 months ago: कुछ गुमशुदा पलों की तलाश में कब से भटक रहे है हम जाने क्यों और कहाँ किसे ढूंढ़ रहे है हम मंजिल पाने … more →
wrote 3 months ago: क्या है मेरा, क्या है पराया क्या है स्थिर,क्या है अस्थिर क्या है नया, क्या है पुराना जो है आज , वो क … more →
wrote 3 months ago: क्या सही है और क्या गलत है क्या हम जानते है या सिर्फ जानने का दिखावा करते है खुद से ज्यादा दूसरो से … more →
wrote 4 months ago: सावन की पहली बारिश में जिसको देखा था मैंने पहली बार वो आज आ गए है फिर हमारे पास पहली बार तब भी हम खा … more →
wrote 4 months ago: करबद्ध निवेदन करते है हम क्षमा आपसे चाहते है जाने अनजाने कोई भूल हुई हो हम से तो क्षमा याचना करते है … more →
wrote 4 months ago: दुनिया के इन झमेलों में, जीवन की इन मुश्किलों में मै जब खुद को अकेला घिरा पाता हूँ खुद को कमजोर और अ … more →
wrote 4 months ago: चाँदनी रातो में, तारो के साये में पानी की लहरों में, इन्द्रधनुष के रंगों में जीवन के हर मोड़ पर,मुश् … more →
wrote 4 months ago: बारिश की बूंदों का मिट्टी की खुशबु का बहती हवा का अनूठा है अहसास माँ के दुलार का बहन के प्यार का पित … more →
wrote 4 months ago: नन्हे कदमो की आहट से , जब सब का दिल खुश हो जाता है तुतली तुतली बातो से , जब सब का मन खिल जाता है ऐसा … more →
wrote 4 months ago: कह कह कर थक गए है, सुन सुन कर पक गए है जाने ये क्या हो रहा है, सोच सोच कर सो गए है | क्लास रूम सोने … more →
wrote 4 months ago: जिसकी आँखों की चमक हमें एक नया सपना दिखाती है और जिस की दिल की हर धड़कन हमें जीने का सच्चा अहसास दिल … more →
wrote 4 months ago: छोटी सी एक कश्ती में गुमसुम से हम बैठे थे कड़वी पुरानी यादो की छाया में हम लेटे थे मन की इच्छा थी कि … more →
wrote 4 months ago: प्यार के मौसम में गुलिस्ता खिलते है हज़ार आप की नज़रो में डूब जाते है हम हर बार किन लफ्जों में करे बय … more →
wrote 1 year ago: कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं हो … more →
wrote 1 year ago: आइए सुने एक नज़्म जो ना जाने किसने लिखी है… पर बहुत कुछ कहती है.. http://gauravsangtani.podo … more →