हमेशा ही तो नही होता काम कभी थक जाता है इंसान रुक जाते हैं हाँथ दिमाग हो जाता है शांत कभी तो कलाकार भी दर्शक बनना चाहता है लड़की माँ बनना चाहती है लड़का पिता बनना चाहता है बड़े बूढे खेलना चाहते है बच्… more →
मेरी भाषा और .....माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: हमेशा ही तो नही होता काम कभी थक जाता है इंसान रुक जाते हैं हाँथ दिमाग हो जाता है शांत कभी तो कलाकार … more →
माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: आज का हमारा जीवन एक तरफ़ भविष्य की चिंता दूसरी तरफ़ हमारी कुंठा आज का हमारा जीवन अब जो भी है जो भी च … more →
माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: मुझ पर हावी हो जाते जब मेरे ही कुछ सपने मुझसे ही राज छिपाते जब मेरे कुछ अपने समस्याएं जब सुलझ सुलझ भ … more →
माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: मन तुझे खुली छूट है उदास होने के लिए, आंसू बहा – बहा रोने के लिए तू चाहे तड़पना अगर तो तड़प जी … more →
माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: जब सांसे बन जाती हैं हंफरी सोचता हूँ कर लूँ दो दो हाँथ अपने सामने खड़े पहलवान से पर पास जाते ही छटक क … more →
माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: कुल्हाड़ी का होना बहुत जरुरी है बहुत काम आती है बहुत से कामो में पर अपने पैर पर पड़े या किसी और के नुक … more →