जो इश्क़ की आग भड़क उठी है जैसे मैं शोलों में जल रहा हूँ तेरे बदन की कशिश का है जादू देखकर तुझ को मचल रहा हूँ मुझे है ख़ाहिशो-तमन्ना1 तेरी मैं उम्मीद को मसल रहा हूँ एक यह ख़ाब मैं देखता हूँ कि तेरी मरम… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 months ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझ … more →
विनय wrote 2 months ago: हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़ सुनने में आया है न करेंगे मुझे मुआफ़ उस ने एक भी मौक़ा न दिया मुझ को … more →
विनय wrote 2 months ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →
विनय wrote 3 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
विनय wrote 3 months ago: कैसे मिलूँ तुमसे जो न मिलना चाहो चला चलूँ अगर साथ चलना चाहो नहीं कहते हो मुझ से हर बार तुम करूँ क्या … more →
विनय wrote 4 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →
विनय wrote 4 months ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →
विनय wrote 4 months ago: वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है जाने सही करता है या ग़लत करता है वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं दिल फि … more →
विनय wrote 4 months ago: यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नह … more →
विनय wrote 4 months ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →
विनय wrote 5 months ago: भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है रूठी हुई हमसे तक़दीर हमारी है मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर ह … more →
विनय wrote 5 months ago: उसने हमसे कभी वफ़ा न की और हमने भी तमन्ना न की बहुत बोलते हैं सब ने कहा सो आदत-ए-कमनुमा न की बहुत आये … more →
विनय wrote 5 months ago: झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्य … more →
विनय wrote 6 months ago: जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे … more →
विनय wrote 6 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
विनय wrote 8 months ago: फिर वही दर्द, वही शाम है लबों पर फिर तेरा नाम है ज़िन्दा हूँ पर ज़िन्दगी नहीं सीने में साँसों का ताम-झ … more →
विनय wrote 1 year ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर क … more →
विनय wrote 1 year ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने मेरे दिल स … more →