Blogs about: मेरी ग़ज़ल

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तुम नहीं तो रंग नहीं होली में4 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजत … more »

जिसे दवा जाना वह भी ज़हर निकला1 comment

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़ … more »

मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला1 comment

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सित … more »

मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more »

कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है4 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है … more »

तुम न समझोगे2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे … more »

और दाँव अपनी जाँ का1 comment

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फ … more »

मोती दो' साथ पिरोना और

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मोती दो’ साथ पिरोना और लड़ना और बिगड … more »

फ़िराक़ को अजल विसाल को जीवन जाना2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: फ़िराक़ को अजल विसाल को जीवन जाना यह कि झ … more »

आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मे … more »

जिगर को चाक करना चाहता हूँ

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जिगर को चाक करना चाहता हूँ साँसों में … more »

ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार क … more »

इस जानिब य उस जानिब

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन … more »

तुम जो देखते हो

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब ह … more »

वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस … more »

दिले-सहरा में यह कैसा सराब है2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दिले-सहरा में यह कैसा सराब है ज़ख़्म मव … more »

जब आसमाँ पे यह हिलाल आया

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमस … more »

दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: दूदे - तन्हाई   के   उस    पार   क्या   है … more »

ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको3 comments

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े … more »


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