Blogs about: मेरी ग़ज़ल
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तुम नहीं तो रंग नहीं होली में
तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
तुम नहीं तो रंग नहीं होली में
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजत … more »
जिसे दवा जाना वह भी ज़हर निकला
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़ … more »
मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सित … more »
मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more »
कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है … more »
तुम न समझोगे
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे … more »
और दाँव अपनी जाँ का
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फ … more »
मोती दो' साथ पिरोना और
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मोती दो’ साथ पिरोना और लड़ना और बिगड … more »
फ़िराक़ को अजल विसाल को जीवन जाना
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: फ़िराक़ को अजल विसाल को जीवन जाना यह कि झ … more »
आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मे … more »
जिगर को चाक करना चाहता हूँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जिगर को चाक करना चाहता हूँ साँसों में … more »
ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार क … more »
इस जानिब य उस जानिब
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन … more »
तुम जो देखते हो
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब ह … more »
वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस … more »
दिले-सहरा में यह कैसा सराब है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दिले-सहरा में यह कैसा सराब है ज़ख़्म मव … more »
जब आसमाँ पे यह हिलाल आया
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमस … more »
दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: दूदे - तन्हाई के उस पार क्या है … more »
ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको
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विनय प्रजापति wrote 3 months ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े … more »
