Blogs about: मेरी गज़लें

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एक ख़ास दोस्त के लिये...4 comments

Rohit Jain wrote 1 week ago: एक पुराने दोस्त की बहुत याद आ रही थी ज़िंदगी ने जिससे जुदा कर दिया है… तो दिल के ख़यालों को ग़ज़ल … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, May 2009

तुमने बना दिया है मोहब्बत में क्या मुझे6 comments

Rohit Jain wrote 1 month ago: तुमने बना दिया है मोहब्बत में क्या मुझे के घूर घूर देखता है ये जहां मुझे आँखों में अश्क़ दिल पे सलीबो … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, May 2009

चाँद से मेरी बातें होती रहीं3 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: दिलकश मेरी रातें होती रहीं चाँद से मेरी बातें होती रहीं जिस तरह मिल रहे हैं ज़मीं आसमां उस तरह मुलाक़ा … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Mar 2009

कब जाने मोहब्बत में ये मक़ाम आ गया2 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: कब जाने मोहब्बत में ये मक़ाम आ गया बजाय ख़ुदा लब पे तेरा नाम आ गया इसको अदा कहूँ के ये एहसान है तेरा त … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Mar 2009

हालात-ए-मुल्क़2 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: आँख में आँसू भरे हैं दिल में ये जज़्बात हैं क्यों मेरे प्यारे वतन के दुख भरे हालात हैं कोई कुछ करता न … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Mar 2009

इश्क़ हमको मिला तो बनके इश्तिहार मिला7 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: इश्क़ हमको मिला तो बनके इश्तिहार मिला नुमाइशों से भरा आपका किरदार मिला हर एक शख़्स यहां हमको बेक़रार मि … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Mar 2009

बात बेबात याद करते हैं2 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: बात बेबात याद करते हैं भूलकर ज़ात याद करते हैं अश्क़ आँखों के रुक नहीं पाते लेके बरसात याद करते हैं ते … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Mar 2009

मेरे ख़ुदा इसे किसी काबिल बनाइये2 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: मेरे ख़ुदा इसे किसी काबिल बनाइये कुछ ग़म इसे भी दीजिये और दिल बनाइये कब तक मुग़ालते में रहूँ नाख़ुदा के … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Feb 2009

ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरह14 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरह बिखर गया हूँ हर गली में फ़साने की तरह मुझे कुछ इस तरह से ढ़ूँढ़ रह … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, jan. 2009

कोई शम्मा सी झिलमिलाती है4 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: आस बंधती है टूट जाती है ज़िंदगी खेल यूँ दिखाती है देख ज़ालिम के तेरे नाम से अब सारी दुनिया मुझे सताती … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, jan. 2009

मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है2 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, DEC 2008, Rohit, jain, 2008, को, है, मेरे, यूँ

कोई सूरज हमारी ताक में है5 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, Rohit, jain, 2008, है

यहाँ पर4 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: जाँ देके हमने दिल को सँभाला है यहाँ पर कुछ ऐसे उसकी याद को टाला है यहाँ पर अब सोचते हैं मौत में ही च … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, DEC 2008

यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे5 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे टूट के बिखरे से तूफ़ान में ये घर होंगे जो अभी उड़ रहा है देख आसमाँ म … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, DEC 2008

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल4 comments

Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, DEC 2008, 2008, , कविता, गज़ल, जैन, ताजमहल, तामीर

फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये4 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये बूँद् में सागर छिपाकर देखिये कितना आसां है जहां को कोसना ख़ुद से ख़ुद क … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, Nov 2008

मोहब्बत में1 comment

Rohit Jain wrote 7 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, 2008, कविता, गज़ल, जैन, दास्तां, पर, पानी

शायद4 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008


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