एक पुराने दोस्त की बहुत याद आ रही थी ज़िंदगी ने जिससे जुदा कर दिया है… तो दिल के ख़यालों को ग़ज़ल में लिख दिया… आप सब के साथ बाँट रहा हूँ, दुआओं में याद रखियेगा… तू कभी बिछड़ा नहीं और तू … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 week ago: एक पुराने दोस्त की बहुत याद आ रही थी ज़िंदगी ने जिससे जुदा कर दिया है… तो दिल के ख़यालों को ग़ज़ल … more →
Rohit Jain wrote 1 month ago: तुमने बना दिया है मोहब्बत में क्या मुझे के घूर घूर देखता है ये जहां मुझे आँखों में अश्क़ दिल पे सलीबो … more →
Rohit Jain wrote 3 months ago: दिलकश मेरी रातें होती रहीं चाँद से मेरी बातें होती रहीं जिस तरह मिल रहे हैं ज़मीं आसमां उस तरह मुलाक़ा … more →
Rohit Jain wrote 3 months ago: कब जाने मोहब्बत में ये मक़ाम आ गया बजाय ख़ुदा लब पे तेरा नाम आ गया इसको अदा कहूँ के ये एहसान है तेरा त … more →
Rohit Jain wrote 3 months ago: आँख में आँसू भरे हैं दिल में ये जज़्बात हैं क्यों मेरे प्यारे वतन के दुख भरे हालात हैं कोई कुछ करता न … more →
Rohit Jain wrote 3 months ago: इश्क़ हमको मिला तो बनके इश्तिहार मिला नुमाइशों से भरा आपका किरदार मिला हर एक शख़्स यहां हमको बेक़रार मि … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: बात बेबात याद करते हैं भूलकर ज़ात याद करते हैं अश्क़ आँखों के रुक नहीं पाते लेके बरसात याद करते हैं ते … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: मेरे ख़ुदा इसे किसी काबिल बनाइये कुछ ग़म इसे भी दीजिये और दिल बनाइये कब तक मुग़ालते में रहूँ नाख़ुदा के … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरह बिखर गया हूँ हर गली में फ़साने की तरह मुझे कुछ इस तरह से ढ़ूँढ़ रह … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: आस बंधती है टूट जाती है ज़िंदगी खेल यूँ दिखाती है देख ज़ालिम के तेरे नाम से अब सारी दुनिया मुझे सताती … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: जाँ देके हमने दिल को सँभाला है यहाँ पर कुछ ऐसे उसकी याद को टाला है यहाँ पर अब सोचते हैं मौत में ही च … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे टूट के बिखरे से तूफ़ान में ये घर होंगे जो अभी उड़ रहा है देख आसमाँ म … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये बूँद् में सागर छिपाकर देखिये कितना आसां है जहां को कोसना ख़ुद से ख़ुद क … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →