Blogs about: मेरी त्रिवेणी

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ज़ियाँ दिल का किया

विनय प्रजापति wrote 4 weeks ago: ज़ियाँ दिल का किया जो तुमसे लगाया तो पल- … more »

हम में जीतने का हौसला है

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बा … more »

सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में4 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में अपनी … more »

दिल का जला होता तब रोशनी होती5 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: दिल का जला होता तब रोशनी होती मैं तो जल … more »

यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते होंगे2 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते हो … more »

निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में ज़्याद … more »

लो! यह दिन भी क़रीब आ गये

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम जब मैं तुम … more »

मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब1 comment

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब मैं मतल … more »

दिल ख़ुद ख़ला है

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: दिल ख़ुद ख़ला है उसमें दूसरी ख़ला क्या … more »

बा-क़ायदा हर्फ़ों में

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: बा-क़ायदा हर्फ़ों में तेरी तस्वीर लिखी ह … more »

शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे … more »

दर्द सुलगते क्यों हैं

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दर्द सुलगते क्यों हैं जलते क्यों नहीं … more »

कुछ तो बोलो!

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: क्यों लोग यहाँ जमा हैं? क्यों वह उदास ब … more »

उफ़! यह छाँव की उमस

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम … more »

मैं जब दुआ करूँ13 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं जब दुआ करूँ तुम आमीन कहो और दुआ क़ुब … more »

तरक़ीब कोई पहाड़ उठाने की

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तरक़ीब कोई पहाड़ उठाने की क्यों इसे सिर … more »

अंगीठी में सुलगता कोयला

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे तब जाकर … more »

वो वक़्त

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वो वक़्त कि वक़्त हमें सिर पे लिए फिरता थ … more »

अंधी ख़ला में

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में किसी च … more »


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