आप कितना भी कमाने लगो आपकी इच्छाओं या कहें जरुरतों और जेब का अंतर बराबर ही रहता है.एक तरफ लगता है कि चीजें अब पहुंच में आ जायेंगी लेकिन नहीं आती दूसरी तरफ लगता कि हम किन चीजों के पीछे भाग रहे हैं और क… more →
हम भी हैं लाइन मेंkakesh wrote 1 year ago: आप कितना भी कमाने लगो आपकी इच्छाओं या कहें जरुरतों और जेब का अंतर बराबर ही रहता है.एक तरफ लगता है कि … more →
kakesh wrote 1 year ago: दरअसल ब्लॉग की शुरुआत एक दैनिन्दिनी या डायरी के रूप में ही हुई थी. लोगो ने इसे अपनी डायरी का ही एक … more →
kakesh wrote 1 year ago: पिछ्ले हफ्ते एक महीने से ज्यादा समय के बाद लिखना शुरु किया.इस बार सारी पोस्टें नये पते पर पोस्ट की ग … more →
kakesh wrote 1 year ago: बहुत दिनों से अपुन गायब है. अभी आया भी तो नये ठिकाने पे. आज ही नया माल डाला है बाप. जरुरीइच आने का … more →
kakesh wrote 2 years ago: अभय जी ने कहा कि “ काकेश जी.. आपके व्यंग्य बाण की राह हम देख रहे हैं” .. जी नहीं आज व्यंग्य की वि … more →