पिछले अंक से जारी अब हम गेट न. पाँच से बाहर निकले. हमने वहाँ तैनात पुलिस वाले को बता दिया की हम फोन खोने की शिकायत करने जा रहे हैं और अभी वापिस आँएगे तो रोकना मत. वह मुस्कुराय और बोला जाओ. हम वहाँ बने… more →
यह भी खूब रहीpryas wrote 1 year ago: पिछले अंक से जारी अब हम गेट न. पाँच से बाहर निकले. हमने वहाँ तैनात पुलिस वाले को बता दिया की हम फोन … more →
pryas wrote 1 year ago: मैं सपरीवार प्रगती मैदान (दिल्ली – 16.11.2008) के व्यपार मेले का लुत्फ उठाने गया. हमेशा की तरह … more →
pryas wrote 1 year ago: आ गये पापा ऑफिस से, मुस्कुराते हुये मेरी बेटी ने पुछा. हाँ बेटी आ गया हूँ. पापा आप थक गये होंगे आपके … more →
pryas wrote 1 year ago: तुम भूल जाओ या याद रखो, कोई आयेगा इसकी आस रखो. धूप में पिघल जायेंगे सपने, जुल्फों की छाँव पास रखो. ह … more →
pryas wrote 1 year ago: 1. बेटी पेट में सपने सजा रही है, माँ ऑटो से अबौर्शन के लिये जा रही है ———— … more →
pryas wrote 1 year ago: -: गरीबी :- 1. कूडे के ढेर से, ब्रैड का पैकेट उठाते हुए, एक बच्चे ने, अपनी माँ से पूछा, “माँ, … more →
pryas wrote 1 year ago: जिंदगी में कभी ऐसी शामें सजें, सितारे जहाँ मेरे मेहमां बनें. समां इस तरह कुछ सजाऊँगा मैं, बस तेरी ही … more →
pryas wrote 1 year ago: कुछ और लिखने का प्रयास किया है. कृपया मेरी गलतियाँ सुधारें. ~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~- … more →
pryas wrote 1 year ago: 1 इस दुनिया को कुछ-कुछ, जानने लगा हूँ. आतंकवाद का चेहरा अब, पहचानने लगा हूँ. ********** 2 धर्म निरपे … more →
pryas wrote 1 year ago: कुछ क्षणिकाँएं लिखने की कोशिश की है. कृपया गलतीयाँ निकालें. स्कुल जाते बच्चे, घर बिठायी जाती बच्चिया … more →
pryas wrote 1 year ago: फूल पत्थर से उगेगा सोचता है आदमी, पर्वतों पिघलोगे इकदिन, सोचता है आदमी. चाँद पर तो घुमने हम कई बार आ … more →
pryas wrote 1 year ago: हाँ, हाँ सुने हैं… …सुने हैं तेरे बडप्पन के चर्चे, बनता है तू मर्यादा पुरूषोत्तम, और ये … more →
pryas wrote 1 year ago: चौदह अगस्त की शाम मेरे लिये एक ना भूलने वाली शाम थी. और मेरे लिये ही क्या ब्लकि उन सभी लोगों के लिये … more →
pryas wrote 1 year ago: कल ऑफिस के काम से बाहर जाना था. गार्ड को बोला की ड्राईवर को गाडी निकालने के लिये कह दे. कोई दो बजे ख … more →
pryas wrote 1 year ago: Hello Papa छोटी सी मेरी बेटी है, पापा-पापा करती है, ऑफिस जब मैं जाता हूँ, वो टाटा-टाटा करती है. ढले … more →
pryas wrote 1 year ago: यहाँ प्रसव पूर्व लिंग की जाँच नहीं होती, पढ कर, एक दमपत्ति, लिंग जाँच करवाने पहुँच गये, वहाँ लगी लम् … more →
pryas wrote 1 year ago: पिछले दिनों मैं महाकवि कालिदास कृत “मेघदूत” पढ रहा था. उसे पढकर मेरे अन्दर का लेखक अँगडा … more →
pryas wrote 1 year ago: तुम नभ हो, मेघ हो, गर्जन हो, तुम धरती पर व्याप्त शक्ति, प्रजनन हो. तुम आग हो, शीतल हो, पानी हो, इस ज … more →
pryas wrote 1 year ago: दफ्तर आते हुए ट्रैफिक सिग्नल पर एक अजीब सा नजारा देखा… एक ३०-३२ वर्ष की गोरी-चिट्टी मोहतरमा अप … more →