वह चाँद से तेरी बातें करना याद आया तेरे लिए सरे-बाम खड़ा होना याद आया गो आज फिर भीग गये पलकों के किनारे वह तुझे देखकर मुस्कुराना याद आया तबीयत के सभी रंग नासाज़ी ने ले लिये वह दिन-रात ख़ुद से लड़ना याद… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वह चाँद से तेरी बातें करना याद आया तेरे लिए सरे-बाम खड़ा होना याद आया गो आज फिर भीग गये पलकों के किन … more →