आज फिर क्यों आँख भर आई है मैं जानता नहीं, आज फिर क्यों उदासी छाई है मैं जानता नहीं, रोते जाऊं यूहीं बस ये ही दिल कर रहा है, रोकर भी दिल उतना ही भारी क्यों हैं मैं जानता नहीं| किस्मत ने अपनों को पराया … more →
ApurnShubhashish Pandey wrote 1 year ago: आज फिर क्यों आँख भर आई है मैं जानता नहीं, आज फिर क्यों उदासी छाई है मैं जानता नहीं, रोते जाऊं यूहीं … more →