मेरे दरवाज़े से अब चाँद को रुकसत कर दो, साथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर से, अपने माथे से हटा दो ये चमकता हुआ ताज, फेंक दो जिस्म से किरणों का सुनहरी ज़ेवर, तुम्ही तन्हा मेरा गम खाने मे आ सकती हो, एक म… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: मेरे दरवाज़े से अब चाँद को रुकसत कर दो, साथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर से, अपने माथे से हटा दो ये … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हम भी शराबी तुम भी शराबी! छलके गुलाबी छलके गुलाबी! तक़दीर दिल की खाना खराबी !! जब तक है जीना खुष होके … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तमन्नाओ के बहलावे में अक्सर आ ही जाते है, कभी हम चोट खाते है, कभी हम मुस्कुराते है! हम अक्सर दोस्तों … more →