ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों की लकीरों में उनका नाम है कहाँ मुझसे दूर खोये हुए हैं वह कुछ भी नहीं है उनकी यादों के सिवा किसी से … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों … more →