जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे मोहब्बत सादा-सादा इक यह फ़र्द तुझ तक पहुँचे धूप सारे आलम में महकी हुई है हर-सू कि मेरे सीने की यह सर… more →
तख़लीक़-ए-नज़रNidhi KM wrote 2 weeks ago: मुझे नही पता, कब-कैसे तुम, मेरी ज़िंदगी मे आए, पता है तो, बस इतना, तुम्हारे आने से, हर मौसम को जिया … more →
K M Mishra wrote 5 months ago: =>री बहना, थोड़ा तेज पांव चला । तुझे पता नहीं कि कल रात हुयी बारिश से परेड ग्राउंड में एक बड़ा ताला … more →
K M Mishra wrote 5 months ago: =>सखी, इस भीषण गर्मी में चार कोस दूर तालाब से मटकी में पानी भर कर लाते-लाते मेरे पैरों में छाले प … more →
K M Mishra wrote 6 months ago: => आइये, आइये तशरीफ लाइये । नोश फरमाइये, मेरे हाथ का बना हुआ ”शीतल मीठा जल“ । ऐसे बनाएं ”शीतल म … more →
K M Mishra wrote 7 months ago: आंधी-पानी से उत्तर प्रदेश में 28 की मौत । बिजली के खंभे उखड़ने से बिजली, पानी की किल्लत । जन जीवन प्र … more →
prithvi wrote 8 months ago: ये कैसा मौसम है दोस्तो! …. चांद पूरा है. पूरा का पूरा. चमकता हुआ. तड़के पौने पांच बजे छत पर ज … more →
prithvi wrote 11 months ago: अबके बरस सावण चौथी मंजिल की छत पर एक पौधा और कुछ घास उग आई है। कई दिनों बाद छत पर गया तो दोनों वहां … more →
विनय wrote 11 months ago: जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिमझिम रिमझिम वर्षा आई, देखो बरखा बाहर आई, हम भीगे तुम भीगे, भीग गया जग सारा, छोटी छोटी बूंदों मे, ब … more →
विनय wrote 1 year ago: इश्क़ सुना है हमने बहुत ज़रा करके तो देखें मिल जाये कोई कमसिन हसीना उसपे मरके तो देखें हाए रे हाए, हाए … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: …Unfortunately a true Love story अजीब सी खामोशी के साथ धीमी बरसात है शायद आज फिर से एक लम्ब … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: टी वी पर समाचार देख/सुन रहे थे कल। समाचार वाचक सुन्दरी ने मौसम का हाल बताते हुए , मुस्कुराते हुए अंग … more →
विनय wrote 1 year ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की मुझको सज़ा दे दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ हाथों की लकीरों … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हमें यह वादा दे दो आओ तो फिर जाओ ना अपनी हँसी से यह घर सजा दो … more →
विनय wrote 1 year ago: शीतल जल में चंदन घुला हो ऐसी थी काया काले-काले बादलों से घनी थी ज़ुल्फ़ों की छाया क्यों जचने लगी यह बे … more →
विनय wrote 1 year ago: यह मौसम है मस्त-मस्त यह आलम है मस्त-मस्त अम्बर पे छायी काली घटा सावन बरसे कर दे मस्त यह मौसम है मस्त … more →
विनय wrote 1 year ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही मगर यह दिल किसी का होना चाहे जबसे मेरी … more →