शरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी । देत पिय पंथ कंथ सन्मुख करत , अतुल करुणामयी नाथ अंग अर्द्धिनी ॥१॥ दीन जन जान रसपुंज कुंजेश्वरी रमत रसरास पिय संग निश शर्दनी । भक्ति दायक सकल भव सिंधु तारिनी करत विध्वंस… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: शरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी । देत पिय पंथ कंथ सन्मुख करत , अतुल करुणामयी नाथ अंग अर्द्धिनी ॥१॥ दी … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिके । जिन्हे भूलि जात पिय सुधि करि देत, कहाँ लों कहिये इनके जु हित के … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री यमुने पिय को बस तुमजु कीने । प्रेम के फंद ते गहिजु राखे निकट ऐसे निर्मोल नग मोल लीने ॥१॥ तुमजु … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री यमुने के साथ अब फ़िरत है नाथ । भक्त के मन के मनोरथ पूरन करत , कहां लो कहिये इनकी जु गाथ ॥१॥ विवि … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री यमुने की आस अब करत है दास । मन कर्म बचन जोरिके मांगत, निशदिन रखिये अपने जु पास ॥१॥ जहाँ पिय रसि … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री यमुना को नाम तेईजू लेहे । जाकी लगन लगी नंदलाल सों सर्वस्व देके निकट रहे हैं ॥१॥ जिनही सुगम जानि … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री यमुने के नाम अघ दूर भाजे । जिनके गुन सुनन को लाल गिरिधरन पिय, आय सन्मुख ताके विराजे ॥१॥ तिहिं छ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: ३४. ऐसी कृपा कीजिये लोजिये नाम । श्री यमुने जग वन्दिनी गुण न जात काहु गिनी, जिनके ऐसे धनी सुन्दर श्य … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्री यमुने तुमसी एक हो जु तुमहीं । करि कृपा दरस निसवासर दीजिये, तिहारे गुनगान को रहत उद्यम ही ॥१॥ ति … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: कौन पे जात श्री यमुने जु बरनी । सबही को मन मोहत मोहत मोहन , सो पिया को मन है जु हरनी ॥१॥ इन बिना एक … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्री यमुना जी को नाम ले सोई सुभागी । इनके स्वरूप को सदा चिन्तन करतम कल न परत जाय नेह लागी ॥१॥ पुष्टि … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: भक्त प्रतिपाल जंजाल टारे । अपने रस रंग मे संग राखत सदा,सर्वदा जोइ श्री यमुने नाम उच्चारे ॥१॥ इनकी कृ … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: रास रससागर श्री यमुने जु जानी । बहत धारा तन प्रतिछन नूतन, राखत अपने उर मां जु ठानी ॥१॥ भक्त को सहि भ … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: भक्त इच्छा पूरन श्री यमुने जु करता । बिना मांगे हु देत कहां लौ कहों हेत, जैसे काहु को कोऊ होय धरता ॥ … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्री यमुने पर तन मन धन प्राण वारो । जाकी कीर्ति विशद कौन अब कहि सकै, ताहि नैनन तें न नेक टारों ॥१॥ च … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्री यमुने अगनित गुन गिने न जाई । श्री यमुने तट रेणु ते होत है नवीन तनु, इनके सुख देन की कहा करो बडा … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्री यमुने रस खान को शीश नांऊ। ऐसी महिमा जानि भक्त को सुख दान, जोइ मांगो सोइ जु पाऊं ॥१॥ पतित पावन क … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्री यमुने पति दास के चिन्ह न्यारे । भगवदी को भगवत संग मिलि रहत हैं, जाके हिय बसत प्राण प्यारे ॥१॥ ग … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: फल फलित होय फलरूप जाने । देखिहु ना सुनी ताहि की आपुनी, काहु की बात कहो कैसे जु माने ॥१॥ ताहि के हाथ … more →