वापिसी में चलते ही पुनः तेज बारिश शुरु हो गयी। पर घोड़े वालों को हमसे ज़्यादा जल्दी थी बालटाल पहुँचने की । वे बेचारे भी सुबह से अबतक चलते-चलते थक चुके थे। सुबह विकट जाम को देखते हुए मिलट्री ने वापिसी मे… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 3 days ago: वापिसी में चलते ही पुनः तेज बारिश शुरु हो गयी। पर घोड़े वालों को हमसे ज़्यादा जल्दी थी बालटाल पहुँचने … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 days ago: पवित्र गुफ़ा के बाहर श्रद्धालू गहरी नींद में सो हुए हमे कुछ पता नहीं। बाहर की हलचल से नींद खुली तो पर … more →
प्रेमलता पांडे wrote 5 days ago: सुबह उठे तरोताज़ा होकर किनारे आए और बस-प्रबंधकजी से भविष्य पूछा। पता चला रास्ता खुल गया है। सभी नहा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 days ago: बाहर पता चला गाड़ियाँ आगे नहीं जा रहीं हैं। हम थ्री-व्हीलर में बैठकर शंकराचार्य-मंदिर देखने चले गए। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 days ago: बीच-बीच में खाने-पीने और अन्य कामों के लिए रुकते-रुकाते गाँवों,क़स्बों और शहरों को पार करते हुए रात्र … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 week ago: दिल्ली से लगभग साढ़े ग्यारह बजे लग्ज़रियस छोटी बस से चले और सुबह सात बजे के आसपास जालंधर पहुँच गए। वह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 week ago: पिछले एक महीने से सरवाइकल-पेन की वज़ह से लिखना-पढ़ना सब बंद सा हो गया। फिजियोथैरपी और व्यायाम ही दिन … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: जोशीमठ पर जैसे ही जाने का मार्ग खुला गाड़ियाँ इत्यादि वाहन जल्दी में गति पकड़ने लगे मानों रुकने के कार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: टिहरी झील देखने के लोभ में देर शाम को ही चल पड़े। पर कैमरे की बैटरी चार्ज्ड न होने के कारण झील के फ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: बद्रीनाथ से कुछ दूरी पर माणा गाँव है। इस पर पहले भी कुछ लिखा था। आज कुछ तस्वीरें और हैं| माणा गाँव … more →
योगेन्द्र wrote 3 months ago: पिछली पोस्ट (मार्च १, २००९) के आगे । मैं इस बात का जिक्र कर चुका हूं कि मेरी पहली दक्षिण-भारत यात्रा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करत … more →
योगेन्द्र wrote 4 months ago: मेरा एक सवाल है: अगर आपको राह चलते कोई व्यक्ति मिल जाये जो आपसे किसी प्रकार की मदद मांगने लगे, तब आप … more →
योगेन्द्र wrote 4 months ago: कन्याकुमारी – विवेकानंद रॉक मेमॉरिअल, शिला स्मारक जब मैं पहली बार (जुलाई १९७३ में, जैसा मुझे य … more →
योगेन्द्र wrote 4 months ago: सुदूर दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के दो-एक पर्यटक स्थलों की दश-द्वादश-दिवसीय यात्रा के पश्चात् मैं अभी हा … more →
Nitin Bagla wrote 5 months ago: कुछ दिन पहले सफर की कतरनें लिखते समय भारतीय रेले के स्लीपर क्लास डब्बों में साइड में तीसरी बर्थ घुसा … more →
योगेन्द्र wrote 6 months ago: परसों के हिन्दी दैनिक समाचारपत्र, ‘हिन्दुस्तान’ (वाराणसी संस्करण, १० दि. २००८), के मुखपृष्ठ के शीर् … more →
Nitin Bagla wrote 8 months ago: दिवाली पर ९ दिन के लिये घर जाना हुआ। रिजर्वेशन कन्फर्म नही हो पाया था, सो जाते समय तो जनरल डब्बे में … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: हम शाम लगभग पाँच बजे जानकीचट्टी पहुँच गए। अति शीतल हवा और बर्फ के नन्हे कणों के समान फुहारों ने हमें … more →