पिछली पोस्ट में बचपन के कुछ टोटकों/धारणाओं पर लिखा था जिन्हें अब याद करके भी हँसी आती है। टिप्पणियों में एक-दो टोटके और पता चले…शायद ‘जनरेशन गेप’ के चलते हमारे बचपन तक वो विलुप्त हो … more →
इन्द्रधनुषambuj wrote 2 weeks ago: खुबसूरत थे वोह पल जब तुम साथ थे मासूम थे वोह पल जब तुम साथ थे नाज़ था हमे खुद पे जब तुम साथ थे जलते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: हमने होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और वहाँ। पर आज मन उड़ चला उस चौराहे पर जहाँ आजकल शाम को सा … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →
सागर नाहर wrote 1 year ago: कनेर के पीले लम्बे फूलों का मीठा रस चूसने का आनन्द आपने लिया कि नहीं? बचपन में हमारे खाने पीने की ची … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: पिछली पोस्ट में बचपन के कुछ टोटकों/धारणाओं पर लिखा था जिन्हें अब याद करके भी हँसी आती है। टिप्पणियों … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: मान्यता से मतलब संजूबाबा वाली मान्यता से ना लगाइयेगा। मैं बात कर रहा हूं छुटपन की अपने कुछ धारणाओं/व … more →
Ami Jha wrote 1 year ago: धूप की रोशिनी मे बागो के फूलो मे चाँद की चाँदनी मे घर की पूजा मे प्राथमिक की परीक्षा मे दशहरे के मे … more →
विनय wrote 1 year ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद … more →
विनय wrote 1 year ago: यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं जब तक अंधेरे में चलते रहे तब तक हम दोनों साथ नहीं जहाँ उजालों क … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थोड़ा-सा और क़रीब हमारे वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे ब … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: 28 दिसम्बर 2007 कुछ सप्ताह पहले ग़जल सम्राट जगजीत सिंह अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें दिमाग में खून का … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: अनामदास अपने चिट्ठे पर योरोप की आसन्न सर्दियों की कंपकंपाहट का अहसास करवा रहे हैं…नीरस, बोझिल, … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: मौसम- अप्रेल अंत और मई शुरू को छोड दें…तो पूरा साल मौसम सन्ट रहता है एकदम…खूब सर्राटेदार … more →
Nitin Bagla wrote 2 years ago: कैसा महसूस होता है जब कोई धीरे धीरे इतना करीब आ जाता है कि पता भी नही चलता और वो जिन्दगी का हिस्सा ब … more →
Nitin Bagla wrote 2 years ago: भुज और सूरत के बाद अपनी अगली मंजिल थी अहमदाबाद । दो बार अहमदाबाद होकर गुजर चुका था, भुज जाते वक्त और … more →
Nitin Bagla wrote 2 years ago: सागर जी ने जब थोक में अपने शिकार बनाये थे तो मुझे भी लपेटे मे ले लिया था…८ सवाल पूँछे हैं जबकि … more →
Nitin Bagla wrote 2 years ago: भुज के बाद अपना अगला पडाव था सूरत । याने गुजरात के पश्चिमी कोने से हमें दक्षिणी छोर की ओर जाना था । … more →
Nitin Bagla wrote 2 years ago: कच्छ, भारत का पश्चिमी कोना, हिन्दुस्तान का दूसरा सबसे बडा जिला । इसी कच्छ के जिला मुख्यालय भुज में अ … more →