यूँ कहने को तो कई दिल-अजीज सा है वो, पर फिर भी सच में बड़ा अजीब सा है वो, दिन रात गैरों को वही सब बाटता रहता, जिस चीज़ के लिए खुद बहुत गरीब सा है वो, कितने दोस्त हैं उसके ज़माने भर में लेकिन, खुद अपन… more →
ApurnShubhashish Pandey wrote 1 year ago: यूँ कहने को तो कई दिल-अजीज सा है वो, पर फिर भी सच में बड़ा अजीब सा है वो, दिन रात गैरों को वही सब … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: (ये कविता मैंने २००५ में अपने seniours के लिए उनके farewell पे लिखी थी, जिसे आज यहाँ publish कर रहा … more →