उसकी गली में यारों आज उससे सामना है कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है पहले तो इस जहाँ ने हँसना बनाया मुश्किल रोने भी अब ना देंगे के ये भी तो अब मना है किसको बताऊँ मुजरिम किस पर करूँ मुकदमा हर हाथ … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में यारों आज उससे सामना है कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है पहले तो इस जहाँ ने हँसना ब … more →