यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर ये समझा नहीं कोई इश्क़ में मिट जाते हैं नाम-ओ-निशां अक़्सर अश्क़ बिखर जाते हैं बरसात का पानी बनकर ख… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 3 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं होता नहीं है बेक़ार करते हैं हमको मालूम है वो है बेवफ़ा फिर भी हम ऐतबार … more →