आप कितना भी कमाने लगो आपकी इच्छाओं या कहें जरुरतों और जेब का अंतर बराबर ही रहता है.एक तरफ लगता है कि चीजें अब पहुंच में आ जायेंगी लेकिन नहीं आती दूसरी तरफ लगता कि हम किन चीजों के पीछे भाग रहे हैं और क… more →
हम भी हैं लाइन मेंkakesh wrote 2 years ago: आप कितना भी कमाने लगो आपकी इच्छाओं या कहें जरुरतों और जेब का अंतर बराबर ही रहता है.एक तरफ लगता है कि … more →
kakesh wrote 2 years ago: दरअसल ब्लॉग की शुरुआत एक दैनिन्दिनी या डायरी के रूप में ही हुई थी. लोगो ने इसे अपनी डायरी का ही एक ह … more →
kakesh wrote 2 years ago: हिन्दी चिट्ठाजगत की दुनिया आजकल शोधमय भी है और हिटास के प्रति जागरूक भी.कोई हिट होना सिखा रहा है तो … more →
kakesh wrote 2 years ago: पिछ्ले कुछ दिनों से दिल्ली से बाहर था..इस शोर शराबे,भीड़ भड़ाके से दूर.. शांत पहाड़ की वादियों में. एक … more →
kakesh wrote 2 years ago: आज कई दिन बाद फिर से अवतरित हुआ हूँ इस ब्लौग में… इस बीच ना जाने कितने नये ब्लौग आ चुके होंगे … more →
kakesh wrote 2 years ago: आजकल हमारी कंपनी , जिसमें मैं काम करता हूँ, में इंक्रीमेंट (वेतन बढ़ोत्तरी) का सीजन है…आमतौर पर … more →
kakesh wrote 2 years ago: आपने जिम और डेला की कहानी तो पढ़ी ही होगी…यदि नहीं पढ़ी तो थोड़ा इसके बारे में भी बता दूं.. ये कह … more →
kakesh wrote 2 years ago: घुघुती जी का ‘आदेश’ हुआ की आप कौवों को फरमान भेजिये कि वो उनके घर के आस पास जायें क्योकि … more →
कमल wrote 2 years ago: रवि जी ने कुछ रैगिंग लेने के अंदाज में पूछा …. “चलिए हमें बताएं कि आप इस चिट्ठे पर हिन्दी में … more →