यह चिट्ठी एक महिला वकील के बचपन के अनुभवों का जिक्र करती हुई, यौन शिक्षा पर जोर देती है। ‘काश मैं एक रात भी, उन हाथों को सपनो में देखे बिना सो सकती’, यह कहना है चेन्नाई की एक २४ वर्षीय सफल… more →
छुट-पुटउन्मुक्त wrote 1 year ago: यह चिट्ठी एक महिला वकील के बचपन के अनुभवों का जिक्र करती हुई, यौन शिक्षा पर जोर देती है। ‘काश … more →
उन्मुक्त wrote 1 year ago: ‘मैं ग़ज़ल हूं। मैं २४ साल पुरुष शरीर के अन्दर, कैद रही शल्यचिकित्सा से आज़ाद हुई। बहुत समय नि … more →
उन्मुक्त wrote 1 year ago: मैं समलैंगिक रिश्तों का हिमायती नहीं हूं पर ऐसे लोगो को हेय दृष्टि से देखना, या उनके साथ भेदभाव करना … more →
उन्मुक्त wrote 3 years ago: मां को कैसे बतायें – यह भी कोई चर्चा का विषय है? है तो … मैंने कुछ दिन पहले मैंने इसी चि … more →
उन्मुक्त wrote 3 years ago: मै आपको स्नो-व्हाईट और सेवेन द्वार्फस की कहानी नहीं बताने जा रहा हूं| मै तो आपसे आईने के प्रतिबिम्ब, … more →
उन्मुक्त wrote 3 years ago: चार बराबर पांच, पांच बराबर चार … माफ कीजयेगा यह पोस्ट फिर से कर रहा हूं| क्या करूं Error 404 प … more →