ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्याले संग जाने वो पल कहाँ खो गए जब सावन की पहली बारिश तन और मन दोनों को भिगो जाती थी जाने वो पल… more →
कुछ िदल सेदीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है क … more →
ambuj wrote 3 months ago: आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा प्रीत के संग छेड … more →
kmuskan wrote 9 months ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प … more →
kmuskan wrote 10 months ago: आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे फिर लीला दिखलाएँगे फिर मटकी तोड़ के माखन चुराएंगे आज फिर कान्हा धरती प … more →
amitabh14 wrote 11 months ago: ख्वाबों के शहर को ढूँढने निकला हूँ .ख्वाब इतने हसीं कैसे होते हैं .रात में आ जाए तो फिर दिन में भी आ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: जीवन के सब रंग लायी, देखो होली आई, लगा के ये रंग क्यों न आज, हम फिर जी उठे, खेल के ये रंगी होली क्यो … more →
kmuskan wrote 1 year ago: तुम साथ हो तो सब अच्छा लगता है अंधेरे मे भी रोशनी का रंग दिखता है हो के जुदा तुमसे ये चाँद भी हमे दर … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर क … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: क्यों सब की ज़ुबाँ पे शिकायत का रंग है इन्सान की ये कौन सी आदत का रंग है लड़ते हो ख़ुदाओं के मज़हबों की … more →
विनय wrote 1 year ago: लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था इस बरस होली के रंग रास नहीं आ … more →
विनय wrote 1 year ago: जब कभी वह शाम मुझे याद आयी मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी माना आज शाम का वह रंग नहीं और मेरी जान त … more →
विनय wrote 1 year ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही मगर यह दिल किसी का होना चाहे जबसे मेरी … more →
विनय wrote 1 year ago: जब साँसों में समायी नयी सुगन्ध जब मिले पत्तों को लाल-हरे रंग जब आया जीवन में मेरे बसंत जब तन-मन में … more →
विनय wrote 1 year ago: हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है तुमको दे … more →
विनय wrote 1 year ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप अब यह आलम है दिलो-ज़हन का करता हूँ हर शै म … more →
विनय wrote 1 year ago: न किसी में वो रंग न किसी में वो बात जो तुम में है… मैं इस दिल को खींचता रहा और दिल मुझको खींच … more →