फैली-पसरी, श्वेत मखमली चादर मे, एक ही रंग दिखता है, श्वेत-श्याम एक-दूजे संग, देखो कितना जचता है… एक रंग मुझे, बंद आँखों से भी, स्पष्ट दिखता जाता है, सारे रंगों को जो, फीका करता जाता है, जब सुर्ख… more →
NidhiKM...Dil Se...Life is not fair...You never know...Hai na...Tum jo bhi ho,sirf tumhare karana ho...Nidhi KM wrote 1 day ago: फैली-पसरी, श्वेत मखमली चादर मे, एक ही रंग दिखता है, श्वेत-श्याम एक-दूजे संग, देखो कितना जचता है … more →
Nidhi KM wrote 4 weeks ago: एक कमरा सपनो भरा, फर्श मखमली, छत सितारों भरीं, दीवारें रंगों सजीं, खिड़कियाँ फूलों रंगीं, सपने कहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है कि … more →
Nidhi KM wrote 8 months ago: हर शब्द कहने के पहले , बहुत बार सोचा… हर कदम उठाने के पहले , बहुत बार रोका… हर धड़कन सुन … more →
ambuj wrote 9 months ago: आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा प्रीत के संग छेडो त … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →
kmuskan wrote 1 year ago: आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे फिर लीला दिखलाएँगे फिर मटकी तोड़ के माखन चुराएंगे आज फिर कान्हा धरती पर आ … more →
amitabh14 wrote 1 year ago: ख्वाबों के शहर को ढूँढने निकला हूँ .ख्वाब इतने हसीं कैसे होते हैं .रात में आ जाए तो फिर दिन में भी आ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: जीवन के सब रंग लायी, देखो होली आई, लगा के ये रंग क्यों न आज, हम फिर जी उठे, खेल के ये रंगी होली क्यो … more →
kmuskan wrote 1 year ago: तुम साथ हो तो सब अच्छा लगता है अंधेरे मे भी रोशनी का रंग दिखता है हो के जुदा तुमसे ये चाँद भी हमे दर … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर क … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: क्यों सब की ज़ुबाँ पे शिकायत का रंग है इन्सान की ये कौन सी आदत का रंग है लड़ते हो ख़ुदाओं के मज़हबों की … more →
विनय wrote 1 year ago: लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था इस बरस होली के रंग रास नहीं आ … more →
विनय wrote 1 year ago: जब कभी वह शाम मुझे याद आयी मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी माना आज शाम का वह रंग नहीं और मेरी जान त … more →
विनय wrote 1 year ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही मगर यह दिल किसी का होना चाहे जबसे मेरी … more →
विनय wrote 1 year ago: जब साँसों में समायी नयी सुगन्ध जब मिले पत्तों को लाल-हरे रंग जब आया जीवन में मेरे बसंत जब तन-मन में … more →
विनय wrote 1 year ago: हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है तुमको दे … more →
विनय wrote 2 years ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप अब यह आलम है दिलो-ज़हन का करता हूँ हर शै म … more →