दर्द देखो शाम घर जाते बाप के कंधे पर बच्चे की ऊब देखो उसको तुम्हारी अंग्रेज़ी कह नहीं सकती और मेरी हिंदी भी कह नहीं पाएगी अगले साल । ********* … more →
अनहद नादरवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 weeks ago: सबसे बडी फूट – रघुवीर सहाय ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमा … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: युक्ति के सारे नियंत्रण तोड़ डाले, मुक्ति के कारण नियम सब छोड़ डाले, अब तुम्हारे बंधनों की कामना है| … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: दर्द देखो शाम घर जाते बाप के कंधे पर बच्चे की ऊब देखो उसको तुम्हारी अंग्रेज़ी कह नहीं सकती और मे … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: रघुवीर सहाय की एक कविता सेब बेचना मैंने कहा डपटकर ये सेब दागी हैं नहीं नहीं साहब जी उसने कहा ह … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: रघुवीर सहाय (1929-1990) अरे अब ऐसी कविता लिखो अरे अब ऐसी कविता लिखो कि जिसमें छंद घूमकर आय घुम … more →