नारी स्वतंत्रता समिति की बैठक आनन फानन में बुलाई गयी। अध्यक्षा का फोन मिलते ही कार्यसमिति की चारों सदस्य उनके घर बैठक करने पहुंच गयी। चारों को देखकर अध्यक्षा बहुत खुश हो गयी और बोली-‘इसे कहते हैं सक्र… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: इतिहास में नाम दर्ज करने की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये वह किसी भी हद तक जाऐंगे। कहीं जिंदा आदमी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपनी कलम से कागज पर काली स्याही से जूता शब्द बार बार इस तरह न सजाओ कि आकाश से झुंड के झुंड बरसने लग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी आकाश से टपकेगी उम्मीद ताकते हुए क्यों अप … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उस दिन उस लेखक मित्र से मेरी मुलाकात हो गयी जो कभी कभी मित्र मंडली में मिल जाता है और अनावश्यक रूप व … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अपने कुछ ब्लाग/पत्रिका का नामकरण हमने मस्तराम के नाम पर आज कर ही दिया। आज होली का पर्व है और एक लेखक … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: जहां तक मेरी जानकारी है खबर में यही था कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद उम्मीदवार ओबामा अपनी जेब में र … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपने मन में है बस व्यापार बाहर ढूंढते हैं प्यार मन में ख्वाहिश सोने, चांदी और धन के हों भण्डार पर दू … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: कठपुतली का खेल दिखाने वाला एक व्यक्ति अपना काम बंद कर स्टेडियम के बाहर मूंगफली का ठेला लगाकर बैठ गया … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपने हाथ से अपने ही सिर पर पहन लेते हैं कोई भी ताज किससे लिया और कैसे सवालों के जवाब में रखते राज म … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: मेरी नाव डुबोने वाले बहुत हैं पर उनकी याद कभी नहीं आती मझधार में भंवर के बीच आकर जो किनारे तक पहुंचा … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अब तो मुद्दे जमीन पर नहीं बनते हवा में लहराये जाते राई से विषय पहाड़ बताये जाते मसले अंदर कमरे में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् हिंदी में भावार्थ-परिवर् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ ऐसी घटनाएँ अक्सर समाचारों में सुर्खियाँ बनतीं है जिसमें पति अपनी पत्नी की हत्या कर देता है १. क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तरुवर जड़ से काटिया, जबै तम्हारो जहाज तारे पर बोरे नहीं, बांह गाहे की लाज संत कबीर दास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नूनं हि ते कविवरा विपरीत वाचो ये नित्यमाहुरबला इति कामिनीनाम् । याभिर्विलालतर तारकदृष्टिपातैः शक्रा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह ज्ञानी थे और अभी प्रवचन कार्यक्रम कर लौटे थे। मेरे से उनकी मुलाकात उनके यजमान के घर पर जो कि मेर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिन व्यक्तियों के पास विद्या, दान, शील तप के गुण नहीं हैं वह व्यक्ति इस पृथ्वी पर बोझ है और वह पशु … more →