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दीपावली का पर्व निकल गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →

Tags: abhivyakti, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, व्यंग्य, संपादकीय, सन्देश

इसलिये सोचना ही बंद-आलेख (mor thinking is not good-hindi lekh)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अखबार में खबर छपी है कि ‘ब्रिटेन ने माना है कि तेल के व्यापार की वजह से बम विस्फोट के एक आरोपी को छो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, संपादकीय

चांदी के कप की खातिर- हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: इतिहास में नाम दर्ज करने की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये वह किसी भी हद तक जाऐंगे। कहीं जिंदा आदमी … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, India, व्यंग्य, अनुभूति, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya

कागज़ पर कलम से जूते न सजाओ-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: अपनी कलम से कागज पर काली स्याही से जूता शब्द बार बार इस तरह न सजाओ कि आकाश से झुंड के झुंड बरसने लगे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, हास्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

यह जिंदगी शब्दों का खेल है-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी आकाश से टपकेगी उम्मीद ताकते हुए क्यों अप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शेर, Blogging, Deepak bharatdeep, Friends

व्यंग्य भी होता है एक तरह से विज्ञापन (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: उस दिन उस लेखक मित्र से मेरी मुलाकात हो गयी जो कभी कभी मित्र मंडली में मिल जाता है और अनावश्यक रूप व … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, hasya vyang, vyangya, writer, हिंदी आलेख, hindi article, Hindi writing, Friends

मस्त राम...............की हिप हुर्र हुर्र1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अपने कुछ ब्लाग/पत्रिका का नामकरण हमने मस्तराम के नाम पर आज कर ही दिया। आज होली का पर्व है और एक लेखक … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, bharat, व्यंग्य, साहित्य, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

किसी की भक्ति भी होती है सनसनीखेज खबर- हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जहां तक मेरी जानकारी है खबर में यही था कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद उम्मीदवार ओबामा अपनी जेब में रखन … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, bharat, India, व्यंग्य, कविता, hasya

शैतान कभी मर नहीं सकता-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे अ … more →

Tags: आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, darshan, व्यंग्य, सन्देश, अनुभूति, Deepak bharatdeep

अपनी कविताओं से दूसरों के ईमेल कूड़ेदान की तरह नहीं सजाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →

Tags: inglish, कविता, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, क्षणिका, Urdu, Education, online jurnalism

प्यार का पहला शब्द कहना सीख ले-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने मन में है बस व्यापार बाहर ढूंढते हैं प्यार मन में ख्वाहिश सोने, चांदी और धन के हों भण्डार पर दू … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अभिव्यक्ति, bharat, India, व्यंग्य, कविता, Kavita, सन्देश

असली पुतलों का खेल-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कठपुतली का खेल दिखाने वाला एक व्यक्ति अपना काम बंद कर स्टेडियम के बाहर मूंगफली का ठेला लगाकर बैठ गया … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, अभिव्यक्ति, bharat, India, व्यंग्य, Sahitya, हास्य

सस्ते में बिकने से आता नहीं आदमी बाज-हिन्दी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने हाथ से अपने ही सिर पर पहन लेते हैं कोई भी ताज किससे लिया और कैसे सवालों के जवाब में रखते राज मे … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, Adhyaatm, bharat, India, व्यंग्य, कविता, Sahitya, सन्देश

आँखें उनको देखने को तरस जाती हैं-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरी नाव डुबोने वाले बहुत हैं पर उनकी याद कभी नहीं आती मझधार में भंवर के बीच आकर जो किनारे तक पहुंचा … more →

Tags: आलेख, darshan, bharat, India, व्यंग्य, hasya, हास्य, सन्देश, विचार

विषयों के पहाड़ खोदने से क्या फायदा-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब तो मुद्दे जमीन पर नहीं बनते हवा में लहराये जाते राई से विषय पहाड़ बताये जाते मसले अंदर कमरे में क … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, bharat, India, कविता, Kavita, सन्देश, साहित्य, अनुभूति

भृतहरि शतकःसंसार में आ रहे परिवर्तन से विचलित न हों

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् हिंदी में भावार्थ-परिवर्त … more →

Tags: आलेख, संपादकीय, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, hindu, Adhyaatm, darshan, bharat, Sahitya

मिलन के साथ वियोग भी आसान होना चाहिए-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ ऐसी घटनाएँ अक्सर समाचारों में सुर्खियाँ बनतीं है जिसमें पति अपनी पत्नी की हत्या कर देता है १. क् … more →

Tags: आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, darshan, व्यंग्य, सन्देश, विचार, साहित्य

संत कबीर वाणी:काटने पर भी लकडी जहाज बनकर पार लगाती है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तरुवर जड़ से काटिया, जबै तम्हारो जहाज तारे पर बोरे नहीं, बांह गाहे की लाज संत कबीर दास जी कहते हैं क … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, अभिव्यक्ति, Kabir, aadhyatm, dharm, Adhyaatm, dohe, हिन्दू

भृतहरि शतक:स्त्री को अबला मानना विपरीत बुद्धि का प्रमाण

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नूनं हि ते कविवरा विपरीत वाचो ये नित्यमाहुरबला इति कामिनीनाम् । याभिर्विलालतर तारकदृष्टिपातैः शक्राय … more →

Tags: आलेख, चिंतन, अभिव्यक्ति, aadhyatm, hindu, dharm, हिन्दू, धर्म, bharat


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