एक ऐसे समय में (a poem by ravi kumar, rawatbhata) एक ऐसे समय में जब काला सूरज ड़ूबता नहीं दिख रहा है और सुर्ख़ सूरज के निकलने की अभी उम्मीद नहीं है एक ऐसे समय में जब यथार्थ गले से नीचे नहीं उतर रहा है औ… more →
सृजन और सरोकाररवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 weeks ago: एक ऐसे समय में (a poem by ravi kumar, rawatbhata) एक ऐसे समय में जब काला सूरज ड़ूबता नहीं दिख रहा है … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: फिर से लौटेंगे भेड़िए – रवि कुमार ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) एक कविता पोस्टर … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 4 months ago: अहम नाक़ाबिलियतों के बाबजू्द (a poem by ravi kumar, rawatbhata) जो अपना ज़मीर नहीं मार सकते वे इस मौजू … more →