जप तप तीरथ नेम धरम व्रत मेरे श्री वल्लभ प्रभु जी कौ नाम। सुमिरों मन सदा सुखकारी दुरित कटै सुधरे सब काम॥१॥ हृदै बसैं जसोदा सुत के पद लीला सहित सकल सुख धाम। रसिकन यह निर्धार कियो है साधन त्यज भज आठौ जाम… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: जप तप तीरथ नेम धरम व्रत मेरे श्री वल्लभ प्रभु जी कौ नाम। सुमिरों मन सदा सुखकारी दुरित कटै सुधरे सब क … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: श्री वल्लभ प्रभु करुणा सागर, जगत उजागर गाइये। श्री वल्लभ के चरण कमल की, बलि बलि बलि बलि जाइये॥१॥ वल् … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: तुम नंदमहर के लाल मोहन जाने दे। रानी जसुमति प्रान आधार मोहन जाने दे॥ ध्रु.॥ श्री गोवर्धन के शिखर तें … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: पवित्रा पेहेरी हिंडोरे झूले। श्यामा श्याम बराबर बैठे निरखत ही समतुले ॥१॥ ललितादिक झुलावत ठाडी खंभन ल … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: प्रिय तेरी चितवन ही में टोना । तन मन धन बिसर्यो जब ही तें, देख्यो स्याम सलोना ॥१॥ ढिंग रहबे कु होत व … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: मेरे तो गिरिधर ही गुणगान। यह मूरत खेलत नयनन में , यही हृदय में ध्यान ॥१॥ चरण रेणु चाहत मन मेरो, यही … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: प्रिय तोहि नयनन ही में राखूं। तेरी एक रोम की छबि पर जगत वार सब नाखूं ॥१॥ भेटों सकल अंग सांबल कुं, अध … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: सेन कामकी लायो,सो सावन आयो। चल सखी झूलिये सुरंग हिंडोरे, कीजे श्याम मन भायो॥१॥ हाव भाव के खंभ मनोहर, … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: देखो माई हरियारो सावन आयो। हर्यो टिपारो शीश विराजत काछ हरी मन भायो॥१॥ हरी मुरली हे हरि संग राधे, हरी … more →