हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं चेहरे पे हर मिजाज़ के विसाल रहते हैं मिलने की आरज़ू में और मिलने के बाद भी हर हाल में हम जानेजाँ बेहाल रहते हैं कह दूँ मै हाल-ए-दिल तुझे, या नहीं कहूँ हर पल मेरे ज़ेहन मे… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं चेहरे पे हर मिजाज़ के विसाल रहते हैं मिलने की आरज़ू में और मिलने के ब … more →